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हिंदी पखवाड़ा 2026 का भव्य समापन एवं साहित्यिक उत्सव

हिंदी है हम, हिंदी है हमारी पहचान
हिंदी पखवाड़ा 2026 का भव्य समापन एवं साहित्यिक उत्सव
14 सितंबर - हिंदी दिवस के अवसर पर वर्धमान एकेडमी रेलवे रोड, मेरठ के विशाल परिसर में 'हिंदी पखवाड़े' का आज गरिमामय समापन हुआ।
पूरा पखवाड़ा हिंदी की साहित्यिक सुगंध से महका रहा। कक्षा 1 से 12 तक के प्रत्येक विद्यार्थी ने इसमें बढ़-चढ़कर भाग लिया और यह सिद्ध कर दिया कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारे संस्कारों की आत्मा है।
इस पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं की झलकियाँ इस प्रकार रहीं -
कक्षा 1 से 5 - "कल्पना से सृजन तक" कहानी वाचन प्रतियोगिता*
जहाँ नन्हें हाथों ने कल्पना की उड़ान भरी। यह सिर्फ वाचन नहीं, उनके कोमल मन की रचनात्मकता का उत्सव था।
कक्षा 6 - शब्द-चित्र प्रतियोगिता
शब्दों से चित्र बनाना, यही तो हिंदी का जादू है। कक्षा 6 के विद्यार्थियों ने 'महाराणा प्रताप, रानी लक्ष्मी बाई जैसे विषयों पर शब्दों के माध्यम से अद्भुत चित्र उकेरे। हर शब्द एक रंग बन गया।
कक्षा 7 - समाचार लेखन प्रतियोगिता
हमारे नन्हें पत्रकारों ने आज के समाचार लेखक को भी पीछे छोड़ दिया। विद्यालय के खेल दिवस, विज्ञान प्रदर्शनी और स्वच्छता अभियान पर ऐसी सजीव और प्रभावशाली रिपोर्टिंग की, मानो सच का समाचार पत्र तैयार हो गया हो।
कक्षा 8 - 'वीर रस' काव्य पाठ अंतर सदनीय प्रतियोगिता
जब मंच से "तू भी है राणा का वंशज फेंक जहां तक भाला जाए महाराणा प्रताप की गाथाएँ गूँजी, तो पूरा सभागार जोश और देशभक्ति से भर उठा। इस प्रतियोगिता में टैगोर सदन ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
कक्षा 9 10 - अंतर्-सदनीय वाद-विवाद प्रतियोगिता*
विषय था - "क्या युवाओं की राजनैतिक जागरूकता चुनावों तक ही सीमित रहनी चाहिए?"
यह पखवाड़े की सबसे बौद्धिक प्रतियोगिता रही। पक्ष-विपक्ष के तीखे तर्क, लोकतंत्र की गहरी समझ और निडर अभिव्यक्ति ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया। विषय के पक्ष में शिवाजी सदन और विपक्ष में जवाहर सदन ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
* कक्षा 11 12 - साहित्यिक गोष्ठी*
पखवाड़े का सबसे परिपक्व और गंभीर आयोजन।
वरिष्ठ विद्यार्थियों ने हिंदी साहित्य के तीन स्तंभों पर गहन चर्चा की -
- मुंशी प्रेमचंद - समाज का यथार्थ
-महादेवी वर्मा - करुणा और वेदना की अभिव्यक्ति
- मन्नू भंडारी - आधुनिक नारी चेतना
साहित्यिक चर्चा के अंतर्गत छात्र-छात्राओं ने आज के परिवेश की सम्मिलित भाषा को आधार बनाकर 'बदलती भाषा घटते संस्कार- अभिव्यक्ति की मर्यादा और हमारी जिम्मेदारी 'विषय पर भी महत्वपूर्ण चर्चा कीl
*समापन समारोह* में प्रधानाचार्या श्रीमती रूपाली चौधरी जी ने सभी विजेताओं को बधाई दी और कहा - "अंग्रेजी ज्ञान की भाषा हो सकती है, पर हिंदी हमारे मान की भाषा है।" हिंदी केवल हमारी अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति ,संवेदना और संस्कारों की सशक्त वाहक है। हमें हिंदी का सम्मान करते हुए इसके समृद्ध साहित्य एवं विरासत से जुड़ना चाहिए।
हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
हिंदी हैं हम, वतन है हिन्दोस्तां हमारा!